जीने की राह

जब दर्द और कड़वी बोली,*
*दोनों सहन होने लगे,*
*तो समझ लेना की*
*जीना आ गया।*
*घमंड से अपना सर ऊँचा न करें*
*जीतने वाले भी अपना मेडल,*

सिर झुकाकर हासिल करते है

✍       _*ताकत की जरुरत*_

                _*तभी होती है..,*_
                   _*जब कुछ*_
               _*बुरा करना हो..,*_

                     _*वरना*_

            _*दुनिया में सब कुछ*_
                 _*पाने के लिए*_
              _*प्रेम ही काफी इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं प्रेम से रहो खुश रहो आबाद रहो स्वस्थ रहो तंदुरुस्त रहो यही दुआ करते रहता हूं आप सबके लिए आप भी मेरे लिए दुआ जरूर करते रहा करो*

✒️md azruddin naneu



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